पटना उच्च न्यायालय की खंडपीठ, जिसमें माननीय मुख्य न्यायाधीश श्री संगम कुमार साहू एवं माननीय श्री न्यायमूर्ति हरीश कुमार सम्मिलित हैं, ने 12 मई, 2026 को एक महत्त्वपूर्ण आदेश पारित किया। यह आदेश बिहार के कारागारों तथा बिहार राज्य मानसिक स्वास्थ्य एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान (BIMHAS), कोइलवर, भोजपुर में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की दशा से संबंधित स्वतः संज्ञान कार्यवाही में पारित किया गया, जिसे आकांक्षा मालवीय बनाम भारत संघ एवं अन्य (CWJC संख्या 19702/2021) के साथ संयुक्त रूप से सुना गया।
यह कार्यवाही एक निरीक्षण प्रतिवेदन के आधार पर प्रारम्भ हुई, जिसमें बिहार के कारागारों में बंद मानसिक रोगियों तथा BIMHAS में भर्ती रोगियों की दयनीय दशा उजागर हुई थी। तत्पश्चात् न्यायालय क्रमशः कारागारों में मानसिक स्वास्थ्य इकाइयों की स्थापना, स्वस्थ हो चुके रोगियों के पुनर्वास, व्यावसायिक प्रशिक्षण ढाँचे, विधिक सहायता की सुलभता तथा विद्यालय स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों की निगरानी करता रहा है।
इस सुनवाई में उठा सर्वाधिक गम्भीर प्रश्न पुनर्वास गृहों (हाफ-वे होम) की अनुपलब्धता से सम्बंधित था। न्यायालय ने पाया कि 26 ऐसे रोगी, जिन्हें चिकित्सकीय रूप से पूर्णतः स्वस्थ घोषित किया जा चुका है, केवल इसलिए मानसिक चिकित्सालय में बंद रहने को विवश हैं क्योंकि पटना के दोनों हाफ-वे होम में अपनी निर्धारित क्षमता 50-50 बिस्तरों के विरुद्ध क्रमशः 51 व 65 रोगी पहले से भर्ती हैं और कोई रिक्त स्थान उपलब्ध नहीं है। न्यायालय ने इस स्थिति को अत्यन्त खेदजनक बताते हुए स्पष्ट रूप से अभिनिर्धारित किया कि किसी स्वस्थ अथवा उपचारित रोगी को मानसिक चिकित्सालय में एक भी दिन के लिए जबरन रोके रखना मानवाधिकारों का सुस्थापित उल्लंघन है। न्यायालय ने मानसिक स्वास्थ्य सेवा अधिनियम, 2017 की धारा 19 का संदर्भ देते हुए कहा कि मानसिक रोग से उपचारित व्यक्तियों को सामुदायिक जीवन जीने का वैधानिक अधिकार प्राप्त है और उन्हें केवल बेघर होने, परिवार के न होने अथवा सामुदायिक सुविधाओं के अभाव के आधार पर पृथक नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने महाधिवक्ता से इन 26 व्यक्तियों के लिए कोइलवर में जून 2026 तक प्रस्तावित दो अतिरिक्त हाफ-वे होम के निर्माण तक तत्काल अंतरिम व्यवस्था करने का आश्वासन प्राप्त किया।
न्यायालय ने महत्त्वपूर्ण निर्णय सुकदेब साहा बनाम आंध्र प्रदेश राज्य एवं अन्य (2025 SC Online 1515) पर विचार करने के पश्चात् कार्यवाही का दायरा विद्यालय स्तरीय मानसिक स्वास्थ्य तक विस्तारित किया और बिहार सरकार के शिक्षा विभाग के सचिव तथा भारत सरकार के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव को पक्षकार के रूप में संयोजित करते हुए मानसिक स्वास्थ्य सेवा अधिनियम, 2017 की धारा 29 के अंतर्गत विद्यालयों के लिए राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण नीति तैयार करने के सम्बन्ध में शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया।
न्यायालय ने चार केन्द्रीय कारागारों में मानसिक स्वास्थ्य इकाइयों की स्थापना, BIMHAS में 10 शय्याओं वाले मातृ एवं शिशु वार्ड के निर्माण, 'मनो न्याय विधिक सेवा क्लिनिक' की स्थापना तथा BIMHAS में ICU उपकरणों की खरीद के लिए 47.12 लाख रुपये की स्वीकृति जैसे सकारात्मक कदमों की सराहना की। साथ ही न्यायालय ने राज्य सरकार से अपेक्षा की कि प्रदेश के विभिन्न भागों में हाफ-वे होम की अग्रिम रूप से स्थापना सुनिश्चित की जाए ताकि स्वस्थ हो चुके किसी भी रोगी को मानसिक चिकित्सालय में एक भी दिन न बिताना पड़े। न्यायालय ने इस मामले की अगली सुनवाई 23 जून, 2026 को नियत की है।
Case details:
Case No.: CWJC No. 2805 of 2026 (with CWJC No. 19702 of 2021)
Bench: Hon'ble the Chief Justice Sangam Kumar Sahoo & Hon'ble Mr. Justice Harish Kumar
Petitioner: Court on its own motion / Akanksha Malviya
Respondents: State of Bihar & Ors. / Union of India & Ors.
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